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खूबसूरती की तारीफ शायरी २ लाइन || khubsurti ki tareef shayari 2 line

khubsurti ki tareef shayari 2 line

खूबसूरती की तारीफ शायरी

तू जरा सी कम खूबसूरत होती
तो भी बहुत खूबसूरत होती

सफाईयां देनी छोड़ दी है
मैं बहुत बुरी हूं सीधी सी बात है

बहक ना जाए कहीं लौ की नियत
होठों से दीया तू बुझाया ना कर

khubsurti ki tareef shayari 2 line

लड़ने दो जुल्फों और हवाओं को आपस में
तुम क्यों हाथ से उन में सुलह कराने लगती हो

करते है   मेरी खामियों का बयान इस तरह लोग,
अपने किरदार में फरिश्ते हो जैसे

खूबसूरती की तारीफ शायरी २ लाइन

 

तेरे इश्क ने सरकारी दफ्तर बना दिया दिल को
ना कोई काम करता है कोई बात सुनता है

क्या लिखूं तेरी तारीफ ए सूरत में यार
अल्फाज कम पड़ रहे हैं तेरी मासूमियत देखकर

जब से कमाने की होड़ में जुड़ी हूं
मेरी गुल्लक में सपने कम हो रहे हैं

अहमियत दी तो कोहिनूर खुद को मानने लगे,
कांच के टुकड़े भी क्या खूब वहेम पालने लगे।

सौ बार कहा दिल से चल भुल भी जा उसको,
सौ बार कहा दिल ने तुम दिल से नही कहते।

तारीफ शायरी 2 लाइन

बारिश और मोहब्बत दोनों ही यादगार होते हे,
बारिश में जिस्म भीगता हैं और मोहब्बत मैं आँखे।

 

मैं रोज़ लफ़्ज़ों में बयान करता हूँ अपना दर्द,
और सब लोग सिर्फ़ वाह वाह कह कर चले जाते है। ?

खूबसूरती की तारीफ शायरी इन हिंदी

मिल जायेगे हमारी भी तारीफ करने वाले
कोई हमारी मौत की अफवाह तो फैला दो

 

इन आँखों को जब जब उनका
दीदार हो जाता है
दिन कोई भी हो, लेकिन मेरे लिए
त्यौहार हो जाता है

 

जब मैंने चाँद को अपना चाँद दिखाया,
रात में निकला पर हुस्न पर नहीं इतराया.

 

हुस्न को शर्मसार करना ही
इश्क़ का इंतिक़ाम होता है

 

ये आईने ना दे सकेंगे तुझे तेरे हुस्न की खबर,
कभी मेरी आँखों से आकर पूछो के कितनी हसीन हों तुम।

तारीफ 2 लाइन शायरी

 

तेरी सादगी का हुस्न भी लाजवाब है,
मुझे नाज़ है के तू मेरा इंतेख़ाब है।

 

गए थे उनके हुस्न को बेनकाब करने,
खुद उनके इश्क का नकाब पहनकर आ गए।

 

या रब मेरे महबूब को सलामत रखना
वर्ना मेरे जीने की दुआ कौन करेगा

 

मर गया मैं खुली रही आँखे
मीना तेरे आशा की हद थी.

खूबसूरती की तारीफ शायरी 

 

खीर से जी भरा नही बनाओं माला पनीर
जल्दी माला आओ या भेजो अपनी तस्वीर

 

तेरी याद में न चैन रहे न करार
ख़त दे दिया करे क्यों जला रहे हो यार

खूबसूरती की तारीफ शायरी इन हिंदी

इश्क के फूल खिलते हैं तेरी खूबसूरत आंखों में,
जहां देखे तू एक नजर वहां खुशबू बिखर जाए।

 

सुबह का मतलब मेरे लिए सूरज निकलना नही,
तेरी मुस्कराहट से दिन शुरू होना है।

खूबसूरती की तारीफ शायरी

 

घूँघट में इक चाँद था और सिर्फ तन्हाई थी,
आवाज़ दिल के धड़कने की भी फिर ज़ोर से आयी थी।

 

तेरे वजूद से हैं मेरी मुक़म्मल कहानी,
मैं खोखली सीप और तू मोती रूहानी…

 

हर बार हम पर इल्जाम लगा देते हो मुहब्बत का,
कभी खुद से भी पूंछा है इतनी खूबसूरत क्यों हो…

 

दीदार हो जाता है
दिन कोई भी हो, लेकिन मेरे लिए
त्यौहार हो जाता है

तारीफ शायरी 2 लाइन

 

क्युकी में तुम्हे वैसे ही पसंद किया है जैसे तुम हो
कल तुम्हारा तारीफ करना अच्छा लगता था तोह
आज दूर रहना,रुक जाना यह भी सही है।

 

तेरे हसन का करू ही क्या में तारीफ तू जो एक
बार मुस्कुरादे तो इश्क़ मेह पड़जाये ये पूरा महफ़िल।

 

तारीफ अपने आप की करना फ़िज़ूल है
खुशबू खुद बता देती है कौन सा फूल है

 

जो लव्स तेरी तारीफ करते नहीं थकते थे
आज वो तेरा नाम तक नहीं लेना चाहते है।
तेरे हुस्न की तारीफ मेरी शायरी के बस की नहीं
तुझ जैसी कोई और कायनात में बनी नहीं
वो कहती हैँ हम उनकी झूठी तारीफ करते हैँ
ए खुदा बस एक दिन आईने को जुबान दे दे

khubsurti ki tareef shayari 2 line

बेअदबी की सज़ा पाने को तेरे दर पे आया हूँ,
हुस्न लफ़्ज़ों में बयाँ करने की कोशिश की थी।

सुना है वो पलकें झुका कर सुबह को शाम करते हैं
ख़ुदा बचाए हमें, वो अपने हुस्न से ही कत्ले आम करते हैं।

 

निकलते हैं घर से सिर्फ इक मुस्कान का गहना पहने,
ख़ुदा कसम, हुस्न की इसी सादगी पे तो हैं फिदा हम।

 

ऑंखे यो की दो पैमाने भरे हों मय के,
हुस्न यो की जैसे ख़ुदा का नूर हो कोई।

 

शोखी से ठाहेरती नहीं कातिल की नजर आज,
ये बर्क-ए-बाला देखिये गिरती है किधर आज।

 

मुझे क्या मालूम था हुस्न क्या होता है
मेरी नज़रों ने तुझे देखा और अंदाजा हो गया

 

फूलों सा कोमल चेहरा तेरा, तू संगमरमर की मूरत है
तेरे हुस्न की क्या तारीफ़ करूँ, तू इतनी खूबसूरत है

 

तेरे हुस्न के आगे मुझे लगता है सब कुछ सादा
आस्मां में है पूरा चाँद पर मुझे लगता है आधा

 

क्या पूछते हो हमसे हुस्न की तारीफ़
हमें जिस से मोहब्बत हुई, वो ही सबसे हसीं

खूबसूरती की तारीफ शायरी २ लाइन

 

ये आईने क्या देंगे तुझे तेरे हुस्न की खबर
मेरी आँखों से तो पूछ कर देख कितनी हसीन है तू

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